सौरव गांगुली ने कहा, भारत 2019 विश्व कप का प्रबल दावेदार

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पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का मानना है कि भारत अपने निरंतर अच्छे प्रदर्शन और योग्यता के कारण किसी भी आईसीसी विश्व कप में जीत के प्रबल दावेदार के रूप में जाता है।

गांगुली ने कहा कि भारत 2003 और 2007 में भी जीत के प्रबल दावेदार के रूप में गया था और इसके बाद 2011 में भी यही हाल था जहां वह विजेता बनने में सफल रहा था।

अपनी आत्मकथा के अनावरण के मौके पर गांगुली ने कहा, “मैं विश्व की सर्वश्रेष्ठ टीम जैसी चीज में विश्वास नहीं करता क्योंकि हर टीम अलग परिस्थति में अलग खेलती है, लेकिन हमारे पास ऐसी टीम है जो काफी मजबूत है।”

भारतीय टीम के पूर्व कप्तान ने कहा, “हम 2003 और 2007 में भी जीत के प्रबल दावेदार के रूप में गए थे और 2011 में भी जहां हमने जीत हासिल की। अभी भी हम जीत के प्रबल दावेदार हैं। यह इसलिए क्योंकि भारतीय क्रिकेट की जो संस्कृति है वो इसे विशेष बनाती है।”

2003 में गांगुली की कप्तानी में ही भारत ने फाइनल में जगह बनाई थी, लेकिन जीत से महरूम रह गई थी। 2007 में टीम का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था और वह पहले दौर में ही हार कर टूर्नामेंट से बाहर हो गई थी।

इस मौके पर मौजूद रहे गांगुली के साथी खिलाड़ी वीरेंद्र सहवाग और युवराज सिंह ने कहा कि भारत 2019 आईसीसी विश्व कप में जीत हासिल करेगा।

अपनी किताब के बारे में गांगुली ने कहा, “मेरे बारे में ऐसा कुछ नहीं है जो यह देश नहीं जानता हो। इसलिए मैंने सोचा कि मैं कुछ लिखूं जिसे युवा क्रिकेट खिलाड़ी याद रखें।”

उन्होंने कहा, “मेरी किताब का शीर्षक ‘ए सेंचुरी इज इनफ’ का मतलब है कि सिर्फ रन बनाने से कोई भी चैम्पियन नहीं बन सकता। शीर्ष स्तर पर उसे कई उतार-चढ़ाव से गुजरना पड़ता है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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