Sonam Wangchuk ने सेना के लिए बनाया सौर ऊर्जा चालित मोबाइल तम्बू

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बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म “थ्री इडियट्स” में ‘फुनसुख वांगडू’ के किरदार के लिए प्रेरणा बने लद्दाख के इंजीनियर सोनम वांगचुक ने अधिक ऊंचाई वाले स्थानों में भारतीय सैनिकों के उपयोग के लिए एक मोबाइल सौर ऊर्जा चालित तम्बू विकसित किया है। उनके मन में यह विचार कैसे आया – यह पूछे जाने पर वांगचुक ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि लगभग 50,000 भारतीय सैनिकों को हाड़ कंपाने वाली सर्दियों में अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात किया गया है तो उन्होंने नवाचार के साथ आने का फैसला किया।

उन्होंने कहा कि भारतीय और चीनी सैनिकों को एलएसी पर कुछ बिंदुओं से हटाया जा रहा है। दोनों ओर से जवान पीछे हट रहे हैं। यह दोनों के लिए अच्छी बात है। कठोर सर्दियों में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगभग 50,000 सैनिकों को तैनात किया गया था। यह एक कठिन स्थिति थी।

वांगचुक ने कहा कि जब सैनिकों को नब्ज जमाने वाले ठंड में तैनात किया जाता है, तो वे कपड़े या लोहे के कंटेनरों से बने टेंट में रहते हैं, और लाखों लीटर मिट्टी के तेल का उपयोग किया जाता है। यह एक बहुत महंगा मामला है क्योंकि इससे पर्यावरण में प्रदूषण भी फैलता है और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ग्लेशियरों को प्रभावित करता है।

उन्होंने कहा कि सैनिकों को केरोसिन का इस्तेमाल करने में भी बहुत परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लद्दाख में वे अधिक ऊंचाई पर आरामदायक जीवन जीने के तरीकों पर नवाचार करते हैं।

पिछले 25 सालों से सोलर-हीटिड घरों पर रिसर्च करने वाले वांगचुक ने कहा कि चूंकि हमारे सैनिक अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में रहते हैं, इसलिए हमने तय किया कि हम उनके लिए सोलर-हीटेड शेल्टर क्यों न विकसित करें।

उन्होंने कहा कि 15 साल पहले उन्होंने लद्दाख के चांगतांग क्षेत्र में खानाबदोश चरवाहों के लिए एक मोबाइल शेल्टर विकसित किया था।

उन्होंने कहा कि हमने हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लद्दाख में एक निष्क्रिय सौर-गर्म तम्बू के प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू कर दिया। तम्बू को विकसित करने में एक महीने का समय लगा।

सेना के लिए यह तंबू दो हिस्सों में बंटा हुआ है – ग्रीन हाउस, जिसे सोलर लाउंज कहा जाता है और स्लीपिंग चैंबर – जहां सैनिक सोते हैं। दोनों भागों को एक पोर्टेबल दीवार से विभाजित किया जाता है, जिसे हीट बैंक कहा जाता है।

सैनिक दोपहर के दौरान ग्रीन हाउस भाग में बैठ सकते हैं और काम कर सकते हैं, जबकि स्लीपिंग चैंबर में, तापमान 15 डिग्री सेल्सियस पर बनाए रखा जाता है। टेंट की कीमत 5 लाख रुपये है।

रक्षा सचिव अजय कुमार ने वांगचुक को धन्यवाद दिया और कहा कि इनोवेशन हमेशा की तरह बहुत प्रासंगिक और परिपूर्ण है।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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