बेटे ने जीवन के प्रति नजरिए को बदला : Hardik Pandaya

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आस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी वनडे में 76 गेंदों पर 90 रनों की पारी खेलने वाले भारत के ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या ने शुक्रवार को कहा कि पिता बनने के बाद उनके लिए जीवन के प्रति नजरिया बदल गया। पांड्या की पत्नी नताशा स्टैनकोविच ने 30 जुलाई को बेटे को जन्म दिया था। इस कपल ने बेटे का नाम अगस्त्या रखा है।

मैच के बाद संवाददाता सम्मेलन में पांड्या ने कहा कि बेटे के जन्म के बाद ही उन्होंने जीवन को दूसरी तरह देखना शुरू किया और यह बदलाव बेहतरी के लिए है।

पांड्या ने कहा कि वह अपने बेटे को मिस कर रहे हैं और जल्द घर लौटना चाहते हैं। बकौल पांड्या, “मैंने जब घर छोड़ था तब वह 15 दिन का था। जब मैं लौटूंगा तब वह चार महीने का हो चुका होगा। मेरे लिए चीजें बदल गई हैं लेकिन यह बदलाव अच्छे के लिए हुआ है। अगस्त्य का जन्म मेरे जीवन का सबसे अच्छा पल है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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