क्या सौर पाल सितारों तक पहुंचाने वाला प्रणोदक हो सकता है

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जयपुर। अंतरिक्ष में कई शोध करने के लिए अंतरिक्षयानों का प्रयोग किया जाता है। इनकों अंतरिक्ष में कैसे गति प्रदान होती है इसके बारे में कभी सोचा है। हम आपको बताते है कि सौर पाल एक प्रणोदन प्रणाली है जो कि तारो द्वारा उत्पन्न विकिरण दबाव के प्रयोग से अंतरिक्षयानों को अंतरिक्ष मे गति देती है। आपको बता दे कि रॉकेट प्रणोदन प्रणाली मे सीमित मात्रा मे इंधन होता है। इस तरह का असीमित मात्रा मे इंधन किसी भी अंतरिक्षयान द्वारा अंतरिक्ष मे खगोलिय दूरीयों को पार कराने मे सक्षम हो सकता है।

जी हां इस प्रक्रिया से कई मीलों दूरी आराम से पार कर सकते है और ऐसे कई  यानों को हम इसकी ऊर्जा से कई अरबों दूर भेज सकते है। अब बताते है कि यह कार्य कैसे करता है-  सौर पाल प्रकाश कणो से ऊर्जा ग्रहण करता है जो कि सौर पाल की दर्पण नुमा परावर्तक सतह से टकराकर वापस लौट जाते है। इसमें हर फोटान का संवेग होता है और यह संवेग फोटान के टकराने पर सौर पाल की परावर्तक सतह को स्थानांतरित हो जाता है।

यह फोटान अपने संवेग का दुगना संवेग सौर पाल को स्थानांतरित कर देते है। इसी तरह से अरबो की संख्या मे फोटान किसी विशाल सौर पाल से टकराने पर उसे पर्याप्त मात्रा मे प्रणोद प्रदान करने मे सक्षम होते है। जानकारी के लिए बता दे कि सौर पाल मे प्रयुक्त परावर्तक पदार्थ किसी कागज से 40 से 100 गुणा पतले होते है तथा इसके ढांचे पर दृढ़ रूप से बंध जाते है। बता दे कि अंतरग्रहीय यात्राओं के लिये सौर पाल का क्षेत्रफल एक वर्ग किमी चाहीये।

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