मूर्ति चुराने वाले चोर ने लिखा भगवान को पत्र, लिखी ऐसी बात जिसे पढ़कर दुनिया है हैरान…

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हाल ही में, मध्य प्रदेश से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसको जानने के बाद में हर कोई हैरान हो गया बताया जा रहा है कि यहां पर एक मंदिर से सोने की मूर्ति चोरी हो गई मगर मूर्ति चुराने वाले ने भगवान को एक पत्र लिखा जिसको पढने के बाद में हर कोई हैरान हो गया । बताया जा रहा है कि यह सारा मामला मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले का है । जिले के गोटेगांव इलाके स्थित खमरिया गांव में एक अज्ञात चोर ने भगवान से लिखित माफी मांगी है । दरअसल, दो दिन पहले गांव के दिगंबर जैन मंदिर से एक मूर्ति चोरी हो गई थी जिसकी शिकायत पुलिस थाने में दर्ज कराई गई थी । पुलिस पूरी सक्रियता से चोरी की हुई मूर्ति की तलाश में जुटी थी, पर कोई सफलता हाथ नहीं लगी ।

बताया जा रहा है कि चोरी के कुछ दिनो के बाद में मंदिर में मूर्ति वापस पंहुच गई. अज्ञात आरोपी रात के समय चोरी की गई मूर्ति को मंदिर के गेट के सामने बोरी में रखकर चला गया और उसके साथ में एक लेटर भी था जिसमें माफी नामा लिखा हुआ था । आरोपी ने पत्र में लिखा, एक तांत्रिक ने कहा था कि जैन धर्म की मूर्ति से खजाना निकलता है. इसके चलते उसने कई जगहों पर जाकर महावीर जी की मूर्ति मांगी, लेकिन किसी ने उसे मूर्ति नहीं दी, इसलिए वह मंदिर से प्रतिमा चोरी करके ले गया था । जिसके बाद उस तात्रिंक ने उससे करीब 2100 रूपए तक अठे लिए इसलिए अब मैं यह मूर्ति वापस रखकर जा रहा हूं भगवान मुझे माफ कर देना ।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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