तो इस तरह से हो सकता है दूसरी सभ्यता से संपर्क

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जयपुर। अगर पृथ्वी के बाहर जीवन है तो इतनी तकनीक के बाद भी कैसे हम संर्पक नहीं कर पा रहे है। एक उपाय अंतरिक्षयान के द्वारा विभिन्न ग्रहो की यात्रा करना है वैसे तो हमारे कई यान इसी की खोज में लगे हुये है पर फिहलाल के अंतरिक्ष यान इतने सक्षम नही है कि वो किसी ग्रह पर जीवन की खोज करने में सक्षम है और इसी के साथ मानव निर्मित एक ही यान सौर मंडल से बाहर जा कर जीवन की खोज कर रहा है लेकिन अब वो खराब होने की कगार पर आ गया है। इसी तरह से संचार माध्यमों से हम दुसरी सभ्यताओं से संपर्क कर सकते है जैसे रेडीयो तरंगे।

वैज्ञानिक बताते है कि पृथ्वी के बाहर यदि कोई बुद्धिमान सभ्यता निवास करती है और विज्ञान मे मानव सभ्यता से ज्यादा विकसित या मानव सभ्यता के तुल्य विकसित है तब वह संचार माध्यमो के लिये रेडीयो तरंगो का प्रयोग अवश्य करती होगी। इसी धारणा को लेकर पृथ्वी से बाहर सभ्यता की खोज प्रारंभ हुयी है। फिहलाल जो वैज्ञानिक सेटी तकनीक का प्रयोग करके दूसरी सभ्यता की खोज कर रही है।  इसका पूरा नाम सर्च फॉर एक्स्ट्राटेरेस्ट्रीयल इन्टेलीजेन्स है। यह सौर मंडल के बाहर बुद्धिमान जीवन की खोज मे लगे एक समूह का नाम है।

सेटी प्रोजेक्ट जो दूसरे ग्रहो की सभ्यताओ से हो रहे विद्युत चुंबकिय संचार की खोज मे लगा हुआ है। गीयुसेप्पे कोकोनी और फिलीप मारीशन ने एक शोध किया उसमें था कि परग्रही सभ्यता के विद्युत चुंबकिय विकिरणो को 1 और 10 गीगा हर्ट्ज पर सुनने की सलाह दी थी। 1420 गीगाहर्टज की आवृत्ति(Frequency) को बाह्य अंतरिक्ष के संकेतो को सुनने के लिये चूना क्योंकि यह साधारण हायड्रोजन गैस की उत्सर्जन आवृत्ति है और हायड्रोजन गैस सारे ब्रम्हाण्ड मे बहुतायत से है। इस श्रेणी की आवृत्तियों को जल विवर का नाम दिया गया।

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