तो इस तरह होती है डीएनए एडिटिंग

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जयपुर। सबसे पहले वैज्ञानिकों की टीम ने दिल की आनुवांशिक बीमारी हाइपरट्रोफिक कार्डियोमियोपैथी का सफाया करते हैं। जन्म के साथ मिलने वाली इस बीमारी के चलते दिल की मांसपेशी मोटी हो जाती है। यह बीमारी 500 लोगों में से एक को होती है।

अमेरिका में वैज्ञानिकों ने एक स्वस्थ महिला के अंडाणु और म्यूटेशन वाले पुरूष का स्पर्म लिया। इन दोनों के मिलन से विकसित हुए भ्रूण में वैज्ञानिकों में म्यूटेशन को खोज निकाला और उसे काटकर बाहर कर दिया। उसकी जगह स्वस्थ डीएनए कड़ी लगायी गयी।

लैब में विकसित किये जाने वाले ऐसे भ्रूणों को कुछ दिन बाद खत्म कर दिया जाता है। जीन एडिटिंग पर काफी विवाद भी होते हैं। गंभीर आनुवांशिक बीमारियां दूर करने में सक्षम समझी जाने वाली इस तकनीक के दुरुपयोग की भी आशंका है।

वैज्ञानिकों के एक वर्ग को लगता है कि जीन एडिटिंग की मदद से एक जैसे डिजाइनर बच्चे विकसित किये जा सकते हैं। फिलहाल नैतिक बहस के बीच सिर्फ कुछ ही देशों में इस पर परीक्षण चल रहा है।

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