तो इसलिए मात्र 850 रुपये की पुरानी अंगूठी बिकी 6 करोड़ रूपए में, खासियत ने पूरी दुनिया के उड़ाए होश

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दोस्तो, आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जिसको हीरे की अंगूठी पहनना का काफी शोक था मगर पैसों की कमी के कारण वो उसे खरीद नहीं पाई, जिसके बाद उसने बाजार से बिल्कुल वैसी ​ही दिखने वाली एक अंगूठी खरीदी और उसे पहन लिया । बताया जा रहा है कि उस महिला ने इस अंगूठी को करीब 33 साल तक पहना मगर जब उसको इसकी सच्चाई का पता चला तो वो हैरान हो गई ।

दरअसल, इस महिला ने बाजार से खरीदी इस अगूंठी को 33 साल तक पहनने के बाद में उसे बेचने के बारे में सोचा जिसके लिए उसने एक शख्स से संपर्क किया । मगर जब उस आदमी ने अंगूठी बेचने के कारण के बारे में पूछा तो महिला ने बताया कि वो अंगूठी के नकली नग के कारण उसे बेचना चाहती है । मगर उस व्यक्ति ने उस अंगूठी के बारे में उस महिला को बताया जिसके बारे में उन कर वो महिला बेहोश होते होत बची ।

उस व्यक्ति ने महिला को बताया कि वो जिस अंगूठी को नकली समझ कर पहन रही है, हकीकत में वो एक असली हीरे की अंगूठी है और ये अंगूठी 26.27-k कैरट डायमंड से बनी हुई है और ये अंगूठी करीब 6 करोड़ 83 लाख थी जिसके बाद इस महिला को उस अंगूठी की अच्छी कीमत मिली ।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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