तो हाइड्रोजन मानचित्र आकाशगंगा के बादलों का खोलेगा राज़

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जयपुर। हमारी आकाशगंगा को मिल्की वे को या मंदाकिनी कहते है। ब्रह्मांड में इसकी आकृति सर्पिलाकार है। वैसे तो हर आकाशगंगा में लगभग 100 अरब तारे होते हैं और ब्रह्मांड में तकरीबन 100 अरब आकाशगंगाएं हैं। वैज्ञानिक कहते है कि अंतरिक्ष से आती हुयी विचित्र ध्वनियां स्टार ट्रेक मूवी में दिखायी गई आकाशगंगाओं की हो सकती है जिसमें कि रहस्यमयी काले घने बादल पूरी आकाशगंगा को घेरे हुये रहते हैं। पहले एक रहस्य की तरह थे लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इन तेज गति वाले बादलों के बारे में जानकारी प्राप्त कर ली है।

इन्होंने बताया कि ये बादल मिल्की वे गैलेक्सी के चारों ओर घूमते रहते हैं। बता दे कि अंतर्राष्ट्रीय रेडियो एस्ट्रोनॉमी रिसर्च सेंटर ने इन बादलों के नक्शे जारी किये हैं। जानकारी दे दे कि रेडियो दूरबीन की मदद से ये नक्शे तैयार किये गये हैं जो कि ये नक्शे इन बादलों के झुंड की शाखाओं के बारे में आकंड़े देते हैं। शोधकर्ताओं ने इसके बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ज्यादातर बादल द्रव्यमान में सूरज से लाखों गुना बड़े तथा इनका व्यास 80,000 प्रकाश वर्ष के जितना विस्तृत है। ये एक रहस्यमयी बादल है जिनकी गति 56 मील प्रति सेकंड दर्ज की गई है।

वैज्ञानिकों को इनके अस्तित्व के बारे में ज्यादा जानकारी हासिल नहीं हो पाई है वैसे तो ये इसको जानने के लिए कोशिश कर रहे हैं। जानकारी दे दे कि आकाशगंगा मिल्की वे पर स्थित इन हाइड्रोजन गैस के बादलों की लोकेशन तथा दिशा का पता लगाने के लिये एस्ट्रोनॉट्स ने मिल्की वे गैलेक्सी का हाइड्रोजन मानचित्र तैयार किया है।  वैज्ञानिक इसको बनाने के लिये एचाआई4पीआई (HI4PI) सर्वे द्वारा न्यूट्रस हाइड्रोजन परमाणुओं पर यह अध्ययन किया गया।

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