तो इसलिए नीचे से खुले होते है मॉल के टॉयलेट, इसके पीछे है बहुत बड़ा कारण…

0
89

अकसर हम लोग कई ऐसी चीजों को देखते है जो कि हमारा ध्यान उनकी तरफ खीच लेती हैं और हमें उनके बारे में सोचने पर मजबूर कर देती हेैं । अकसर आप लोग मॉल में शॉपिंग के लिए जाते होंगे वहां पर जाने के बाद में टॉयलेट भी उपयोग करते होंगे मगर क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर मॉल मे टॉयलेट के दरवाजे नीचे से छोटे कयों होते हैं । तो आज हम आपको इसके बारे में बताने जा रहे हैं ।

बताया जा रहा है कि, वहां के टॉयलेट्स दिन भर इस्तेमाल होते रहते हैं। जिससे वहां के फर्श लगातार खराब होता रहता है । आपको बता दें कि, फर्श और दरवाज़े के बीच जगह होने से टॉयलेट की फर्श खराब नहीं हो पाती हैं और उनको साफ करने में आसानी रहती है । जब टॉयलेट के अंदर मेडिकल इमरजेंसी हो गई और दरवाज़ा बंद होने से बाहर लोगों को पता चल जाएगा।

इसके अलावा कभी-कभी छोटे बच्चे अंदर से टॉयलेट को लॉक कर लेते हैं जिसके बाद उनको समझ में नहीं आता है कि उसे कैसे खोलना है । इसके लिए भी मॉल में टॉयलेट के दरवाजों को नीचे से छोटा किया जाता है।

 


SHARE
Previous articleकेदारनाथ First Review: सारा से इंप्रेस सेलेब्स, कहा- खूबसूरत फिल्म
Next articleरोहित शर्मा ने इस मामले में की सचिन तेंदुलकर की बराबरी
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here