तो दिमाग में क्या क्या चलता है जब हम झूठ बोलते है, जानिये

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जयपुर। हमने कभी ना कभी तो झूठ बोला ही है और जब भी बोला है तब कितने डर डर के बोला है ये खुद को ही पता होता है। जब हम किसी भी बात को छुपाते है तो झूठ का सहारा लेते हैं और जब झूठ बोलते है  तो दिमाग में एक विशेष हिस्से में उत्पन्न संकेतों की करामात होती हैं। जैसा कि हम जानते है कि इंसानी दिमाग एक जटिल उत्तक है जो कि किसी कम्प्यूटर की हार्ड ड्राइव की तरह साधारण तरीके से जानकारी को जमा नहीं करता है। आपको शायद इस बात की खबर नहीं होगी

कि कोई भी गलत जानकारी या भ्रामक सूचना जो हम बोलने वाले होते है, वो सबसे पहले दिमाग के हिप्पोकैम्पस नामक हिस्से में एकत्रित होती है लेकिन दिक्कत तो ये की वहां ज्यादा देर तक नहीं रुकती है। तो इसी कारण से इस दौरान उस हिस्से में झूठ का जन्म होता है उसके बाद झूठे तथ्य को सेरेब्रल कोर्टेक्स में पहुंचाया जाता है जहां सच और झूठ में अंतर किया जाता हैं बता दे कि इस प्रक्रिया को सोर्स इमनेज़िया कहते हैं।

लेकिन समय के साथा झूठ भी दिमाग से मिटता चला जाता है और वो दिमाग द्वारा भुला दिये जाते है। आपको बता दे कि हमारे दिमाग ने जानकारी को किस तरह से इकट्ठा किया था मायने रखता है और आप झूठ किस तरह का बोल रहे हो उस तरीके पर भी वह जानकारी निर्भर करती है। मनोचिकित्सको कहते है कि हमारा दिमाग भावनात्मक तथ्यों पर ज्यादा ध्यान देता है। जब एक जज़्बात दिमाग के ऊपर हावी हो जाता है तो सही गलत समझ में कम आता है।

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