तो इसलिए मुर्दे के मांस को खाते हैं अघोरी, इनके रहस्य जानकर उड़ जाएगी आपकी रातों की नींद..

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इस बात को हम सब जानते हैं कि अघोरी अपने खाने में मुर्दो का मांस खाते हैं मगर वो ऐसा क्यों करते हैं इसके बारे में शायद आप नहीं जानते होंगे । तो चलिए आज हम आपको इसके बारे में बता दें । आपको बता दें कि, अघोरियों का जीवन कठिन है, रहस्यमयी भी और हैरानियों से भर देने वाला है। उनकी साधना विधि और उनके द्वारा की जाने वाली शिव की उपासना सबसे अलहदा है । अघोरी शब्द का संस्कृत भाषा में ‘उजाले की ओर’ मतलब होता है।

ज्यादातर, अघोरियों की आखों पर गौर करें तो उनकी आंखें लाल होती हैं। उनकी आखों को देखकर ऐसा ही लगेगा कि वो बहुत ज्यादा गुस्सा हो पर असलियत में यही होता है कि उनका मन उतना ही शांत होता है। उनके वेशभूष से कोई उन्हें तुरंत पहचान लेगा । उनका कोई मित्र नहीं होता उनका कोई शत्रु नहीं होता। उनके मन में ना राग होता है और न किसी से द्वेष होता है। श्मशान में रात बिताना और कभी जंगल में सो जाना उनके लिए एक सामान्य सी बात है । वो कई दिनों तक बिना भोजन जीवित रह सकते हैं ।

अघोरियों के लिए साधना के पहले किसी भी तरह की मोह-माया का त्याग आवश्यक होता है। इसके बाद सभी तरह के वैराग्य को अपने आराधना के द्वारा प्राप्त करते हैं और फिर श्मशान में कुछ दिन गुजारते हैं।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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