घरेलू वायदा बाजार में करीब 7 साल के उच्चस्तर पर चांदी, सोना भी चमका

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सोने और चांदी के दाम में सोमवार को जबरदस्त तेजी आई। घरेलू वायदा बाजार में चांदी का भाव 2013 के बाद पहली बार एमसीएक्स पर 53,000 रुपये प्रति किलोग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार चला गया। सोने का भाव भी 49000 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऊपर चल रहा था। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर चांदी के सितंबर वायदा अनुबंध में पिछले सत्र से 1738 रुपये यानी 3.38 फीसदी की तेजी के साथ 53100 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार चल रहा था, जबकि इससे पहले चांदी का भाव 53,184 रुपये प्रति किलोग्राम तक उछला, जोकि सितंबर 2013 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। एमसीएक्स पर 10 सितंबर, 2013 को चांदी का भाव 53955 रुपये प्रति किलोग्राम तक उछला।

एमसीएक्स पर सोने के अगस्त वायदा अनुबंध में पिछले सत्र से 305 रुपये की तेजी के साथ 49168 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार चल रहा था, जबकि इससे पहले सोने का भाव 49265 रुपये प्रति 10 ग्राम तक उछला।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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