जैविक खेती के लिए सिक्किम को मिला सोने का तमगा

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जैविक खेती के लिए सिक्किम को सोने का तमगा मिला है। सिक्किम भारत का ऐसा राज्य है जहां की खेती सौ फीसदी जैविक है। प्रदेश को ग्लोबल फ्यूचर पॉलिसी अवार्ड की श्रेणी में प्रतिष्ठित स्वर्ण पुरस्कार मिला है। अंतर्राष्ट्रीय संस्था वर्ल्ड फ्यूचर काउंसिल ने (डब्ल्यूएफसी) ने शुक्रवार को सिक्किम को 2018 का ‘सर्वोत्तम नीति का ऑस्कर’ विजेता घोषित किया।

यह अवार्ड खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ), वर्ल्ड फ्यूचर काउंसिल और आईएफओएएम ऑर्गेनिक्स इंटरनेशनल द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया जाता है। इस अवार्ड की घोषणा हमबर्ग और रोम में एक ही समय में की गई।

इस अवार्ड के लिए बनाई गई सूची में 25 देशों के 51 नीतियों को शामिल किया गया था, जिनमें सबसे अच्छी नीति के लिए सिक्किम को स्वर्ण पुरस्कार के लिए चुना गया।

ब्राजील, डेनमार्क और क्वीटो को रजत पुरस्कार प्रदान किया गया। अवार्ड प्राप्त करने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री पवन चामलिंग के रोम जाने की संभावना है। चामलिंग 25 साल से प्रदेश की सत्ता पर काबिज हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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