श्राद्ध में पूर्वजों को नहीं करना चाहते है नाराज, तो गलती से भी न करें ये काम

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पितृपक्ष आज से शुरू हो चुका हैं वही पितृपक्ष में पूर्वजों को याद कर दान धर्म करने की परंपरा हिंदू धर्म में काफी वर्षां पुरानी मानी जाती हैं। वही इन दिनों ग्रहों की शांति के लिए दान पुण्य और पूजा पाठ भी किए जाते हैं जिसस व्यक्ति अपने पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें। वही इस बार पितृपक्ष 13 सितंबर से शुरू हो चुके हैं जो 28 सितंबर को समाप्त हो जायेंगे। वही इस दौरान कुल 16 श्राद्ध किए जाते हैं वही पितृपक्ष और पिंडदान के समय थोड़ी सी लापरवाही आपके पूरे दान पुण्य और पूजा पाठ पर पानी फेर सकती हैं तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं इस दौरान किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। तो आइए जानते हैं।

पितृपक्ष में अगर आपके दरवाजे कोई मांगने आ गया हैं तो उसे खाली हाथ न जाने दें। वही पितृपक्ष में कोई भी आपसे खाना या फिर पानी मांगने आए तो उसे जरूर दें। यह पितर यानी की पूवर्ज अन्न जल के लिए किसी भी रूप में व्यक्ति के पास आ सकते हैं। वही पितृपक्ष के दौरान किसी भी पक्षी या फिर जानवर को खासतौर पर गया, कुत्ता, बिल्ली, कौए को श्राद्ध पक्ष में कभी नहीं मारना चाहिए। जानवरों की भी सेवा करनी चाहिए। उन्हें भोजन कराएं और पानी पिलाएं।

वही इस दौरान खान पान बिल्कुल ही साधारण होना चाहिए। मांस, मछली, अंडे का सेवन नहीं करना चाहिए। भोजन बिल्कुल सादा होना चाहिए। यानी की खाने में प्याज और लहसुन का भी प्रयोग नहीं करना चाहिए। वही शराब और किसी भी नशीली चीजों का सेवन ना करें इनसे दूरी बना कर रखें।

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