निशानेबाजी : रिजवी ने विश्व कप में जीता स्वर्ण, बनाया विश्व रिकॉर्ड

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बताया जा रहा है कि भारतीय निशानेबाज शाहजार रिजवी ने आईएसएसएफ विश्व कप में पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने के साथ-साथ नया विश्व रिकॉर्ड भी बनाया है। विश्व कप में अपना पर्दापण कर रहे रिजवी ने शनिवार की शाम टूर्नामेंट के पहले दिन फाइनल मुकाबले में 242.3 कर रिकॉर्ड स्कोर बनाया।

भारत के रिजवी ने ओलम्पिक चैंपियन जर्मनी के क्रिस्टियन रीत्ज को मात दी। रीत्ज को 239.7 के स्कोर के साथ रजत पदक के साथ ही संतोष करना पड़ा। भारत के जीतू राय ने 219 के स्कोर के साथ कांस्य पदक पर कब्जा किया।

फाइनल में प्रवेश करने वाले तीसरे भारतीय निशानेबाज ओम प्रकाश मिथारवल 198.4 अंकों के साथ चौथे पायदान पर रहे। महिलाओं के 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में भारत की मेहुली घोष ने 228.4 अंकों के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। यह जूनियर स्तर पर वर्ल्ड रिकॉर्ड भी है।

भारत की अन्य प्रतिभागी अंजुम मुदगिल 208.6 अंकों के साथ चौथे और अपूर्वी चंदेला 144.1 अंकों के साथ सातवें पायदान पर रहीं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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