शिवराज का सोनिया से सवाल : कांग्रेस की मप्र के किसानों से क्या दुश्मनी?

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मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई (जियोलॉजिकल इंडीकेशन) देने की चल रही कवायद के बीच पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए खत पर ऐतराज जताते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखा है। उन्होंने पूछा है कि मध्यप्रदेश के किसानों से आखिर कांग्रेस की क्या दुश्मनी है? मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैगिंग दिलाए जाने के प्रयास पर पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि कृषि उत्पादों को जीआई टैिंगंग दिए जाने से उनको भौगोलिक पहचान मिलती है। अगर जीआई टैगिंग से छेड़छाड़ होती है तो इससे भारतीय बासमती के बाजार को नुकसान होगा। इसका सीधा लाभ पाकिस्तान को मिल सकता है।

पंजाब के मुख्यमंत्री की पाकिस्तान को लाभ मिलने वाली बात पर एतराज जातते हुए मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज ने सीधे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने अमरिंदर सिंह की बात को असत्य बताते हुए लिखा है, “अमरिंदर सिंह का यह कथन पूर्ण रूप से असत्य, नितांत अनुचित एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। यह किसान विरोधी है, मध्यप्रदेश विरोधी है तथा कांग्रेस के किसान विरोधी चरित्र को उजागर करता है।”

चौहान ने राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद किए गए वादे का जिक्र करते हुए लिखा है कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन जाने पर राहुल गांधी ने 10 दिन में किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा की थी, परंतु यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री कमल नाथ ने इसे मजाक बना दिया। किसानों से बार-बार वादे किए गए, मगर कर्जमाफी पर हकीकत में कुछ नहीं हुआ। इतना ही नहीं, फसल बीमा का प्रीमियम भी कमल नाथ सरकार ने नहीं भरा, जिससे किसानों को दावा राशि नहीं मिल पाई।

चौहान ने आगे लिखा है कि राज्य में भाजपा सरकार ने आते ही सबसे पहले फसल बीमा के प्रीमियम की 22 सौ करोड़ रुपये की शेष राशि भरी, तब जाकर किसानों को फसल बीमा का दावा राशि प्राप्त हुई। किसानों को शून्य ब्याज पर दिए जाने वाले कर्ज को भी कांग्रेस ने बंद कर दिया। आखिर मध्यप्रदेश के किसानों से कांग्रेस की क्या दुश्मनी है।

राज्य के बासमती चावल की गुणवत्ता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि मध्यप्रदेश का बासमती चावल अत्यंत स्वादिष्ट होता है और अपने जायके और खुशबू के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। मध्यप्रदेश को मिलने वाले जीआई टैग से अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भारत के बासमती चावल की कीमतों की स्थिरता मिलेगी और देश के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ राइस रिसर्च, हैदराबाद में अपनी उत्पादन सर्वेक्षण रिपोर्ट में दर्ज किया है कि मध्य प्रदेश में पिछले 25 सालों से बासमती चावल का उत्पादन किया जा रहा है।

पंजाब के मुख्यमंत्री के पाकिस्तान को लाभ मिलने वाले बयान का जिक्र करते हुए चौहान ने कहा है कि यह अत्यंत दुखद है कि मध्यप्रदेश के बासमती को जीआई टैग दिए जाने के मामले को पाकिस्तान से जोड़कर अमरिंदर घटिया राजनीति की कोशिश कर रहे हैं।

शिवराज ने सोनिया गांधी से पूछा है कि कांग्रेस पार्टी मध्यप्रदेश किसानों के विरुद्ध क्यों खड़ी है और जहां पूरा देश कोरोना के संकट से जूझ रहा है, अर्थव्यवस्था ध्वस्त है, राज्य सरकार किसानों को हर संभव मदद कर रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस शासित राज्यों की किसानों के प्रति संवेदनहीनता अत्यंत पीड़ादायी है। यदि मध्यप्रदेश का किसान तरक्की करता है, आगे बढ़ता है तो आपको क्या परेशानी है?

न्यूज स्त्रेात आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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