‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में हिस्सा बनने पर Shivangi Joshi ने किया गर्व

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लोकप्रिय धारावाहिक ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के वर्तमान प्लॉट में महिला प्रमुख की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री शिवांगी जोशी को लगता है कि प्रतिष्ठित शो का अहम हिस्सा होना एक आशीर्वाद है। ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ मंगलवार को धरावाहिक के 12 साल पूरे हो गए हैं, वहीं इस दौरान धारावाहिक ने अपना 3,300 एपिसोड पूरे कर लिए हैं।

लीड रोल अभिनेत्री शिवांगी ने आईएएनएस से कहा, “भावना उत्कृष्ट और महान है। मुझे कुछ बेहतरीन अभिनेताओं और चालक दल के साथ स्पेस साझा करने का सौभाग्य मिला है। ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ हिस्सा बनना एक आशीर्वाद है।

इस धारावाहिक में शिवांगी नायरा का किरदार निभा रही हैं।

अभिनेत्री के मुताबिक धारावाहिक की यूएसपी अच्छे डायरेक्शन, अद्भूत स्क्रिप्ट, कहानी और हमारे गुरु और निर्माता राजन शाही सर की विजन के बदौलत है।

शिवांगी को उनकी भूमिका नायरा के लिए काफी फेम मिला।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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