इंडोनेशिया में जहाज में लगी आग, 7 लोगों की मौत

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इंडोनेशिया के सुलावेसी प्रांत में एक जहाज में आग लगने से उस पर सवार दो बच्चों सहित सात लोगों की मौत हो गई और अन्य चार लोग लापता हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी शनिवार को दी। राष्ट्रीय अनुसंधान एवं राहत कार्यालय में पदस्थ मीडिया संपर्क प्रमुख यूसुफ लतीफ ने बताया कि हादसा कोनावे जिले में बोकोरी द्वीप के पास जलमार्ग पर हुआ।

अधिकारियों ने समाचार एजेंसी सिन्हुआ को फोन पर बताया कि आग जहाज के इंजन रूम में लगी। आग बुझाने की काफी कोशिशें की गईं, मगर तुरंत कामयाबी नहीं मिली। आग धीरे-धीरे फैलती गई। बहुत सारे यात्रियों ने पानी में कूदकर जान बचाई।

लतीफ ने बताया कि जहाज में लगी आग को दूसरे जहाज से पानी की बौछार कर बुझाया गया। इस हादसे में कुल 61 लोगों को बचाया गया। इन सबकी जान स्थानीय नाविकों ने बचाई।

उन्होंने कहा कि आग कैसे लगी, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। हादसे की जांच कराई जाएगी।

जहाज सुलावेसी प्रांत के मारोवली जिले में कालेरोआंग बंदरगाह की ओर जा रहा था।

न्यूज स्त्रात आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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