शशि थरूर ने अस्पताल मिलने पहुंची सीतारमण के शिष्टाचार को बताया दुर्लभ गुण

0
26

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण कांग्रेसी नेता शशि थरूर का हाल चाल जानने के लिए मंगलवार को अस्पताल पहुंची।

सोमवार को केरल की राजधानी में स्थित एक मंदिर में एक अनुष्ठान के दौरान थरूर घायल हो गए थे जिसके बाद उन्हें अस्पताल में दाखिल कराया गया था।

थरूर को धार्मिक अनुष्ठान के समय तराजू पर बैठाया गया था। इसी दौरान तराजू की जंजीर टूट गई और थरूर पर आ गिरी। उनके सिर पर 8 टांके लगे हैं।

कांग्रेस विधायक ने कहा कि सीतारमण की शिष्टता से वे गद्गद् हैं। भारतीय राजनीति में ऐसे शिष्टाचार कम ही देखने को मिलते हैं।

थरूर ने ट्वीट कर कहा, “निर्मला सीतारमण के व्यवहार से अभिभूत हूं जो केरल में चुनाव प्रचार की व्यस्तता के बीच सुबह मुझसे मिलने आईं। भारतीय राजनीति में शिष्टाचार एक दुर्लभ गुण है। उन्हें ऐसा उदाहरण पेश करते देख कर अच्छा लगा।”

इस बार थरूर का मुकाबला मिजोरम के पूर्व गर्वनर व भाजपा प्रत्याशी के. राजशेखरन और सीपीआई के निवर्तमान विधायक सी. दिवाकरण के साथ है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleजब निक-प्रियंका की शादी में कम पड़ गई थी बीयर ..
Next articleट्रम्प के अवैध रिश्तो और टेक्स चोरी की मीडिया कवरेज को मिला पुलित्जर अवार्ड
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here