मंदिर में पूजा करने के दौरान घायल हुए शशि थरूर

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तिरुवनंतपुरम से लोकसभा के कांग्रेसी उम्मीदवार शशि थरूर जो अपने क्षेत्र से जीत की हैट्रिक लगाने की तैयारी में हैं, वह सोमवार को यहां एक मंदिर में पूजा अनुष्ठान के दौरान घायल हो गए, जिसके बाद उनके सिर पर 8 टांके लगे हैं।

अपने घर पर पारंपरिक नववर्ष विशु के प्रारंभिक समारोह के बाद वह प्रसिद्ध गांधारी अम्मन मंदिर के लिए रवाना हुए थे।

पूजा के एक अनुष्ठान के दौरान उन्हें तराजू पर बिठाया गया, इसी दौरान तराजू की चेन टूट गई और उनके सिर पर आ गिरी। घटना के तुरंत बाद उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाया गया।

डॉक्टरों ने बताया कि थरूर के सिर पर 8 टांके लगे हैं, उन्हें एक्स-रे के लिए भी ले जाया गया। हालांकि उनकी स्थिति अब सामान्य है।

इस बार शशि थरूर का मुकाबला मिजोरम के पूर्व गर्वनर और भाजपा प्रत्याशी कुम्मानेम राजशेखरन, सीपीआई के निर्वमान विधायक व पूर्व राज्यमंत्री सी. दिवाकरण के साथ है।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में शशि थरूर ने भाजपा प्रत्याशी ओ. राजगोपाल को 15,000 मतों से हराया था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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