शारदीय नवरात्रि : जाने देवी ब्रह्मचारिणी के बारे में और इनकी पूजा के महत्व को

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जयपुर। शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन यानी आज “माता ब्रह्मचारिणी” की पूजा-अर्चना की जाती है। माता ब्रह्मचारिणी जो ब्रह्म और चारिणी शब्द से मिलकर बना है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या ओर चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। मां ब्रह्माचारिणी को हिमालय की पुत्री माना जाता है। इन्होंने कई साल तक भगवान शिव को पाने के लिए तप किया। इनके एक हाथ में कमंडल और दूसरी में रुद्राक्ष है ये सफेद रंग की साड़ी धारण किए हैं।

माता शैलपुत्री की पूजा करें इस मंत्र से –

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

 

देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप

देवी ब्रह्मचारिणी बेहद शांत स्वभाव की हैं, इनके दाहिने हाथ मे जप की माला है ओर बाए हाथ में कमंडल है। ये ब्रह्म का स्वरूप है। ब्रह्मचारिणी देवी को और भी कई नामों से जाना जाता हैं जैसे भगवती दुर्गा, शिवस्वरूपा, नारायनी, पूर्ण ब्रह्मस्वरूपिणी के नाम से प्रसिद्ध है। देवी ब्रह्मचारिणी श्वेत रंग का वस्त्र धारण किये हैं।

पूजा का महत्व

देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से भक्त को तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम  का फल मिलता है। इनकी पूजा करने से जीवन में कठिन परिस्थिति में अपने कर्तव्य का पालन करने की प्रेरणा मिलती है।  देवी अपने भक्तों के दुर्गुणों को दूर करती है। देवी की कृपा से सिद्धि की प्राप्त होती है।

देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा में प्रयोग साम्रगी

देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है देवी को पर्वत राज हिमालय की पुत्री माना जाता है। इनकी पूजा में चीनी का भोग लगाया जाता है। इसके साथ साथ ब्राहमण को चीनी का ही दान दिया जाता है।

 

 

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