शनि जयंती 2020: शनि जयंती पर इन अचूक मंत्रों से दूर करें शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव

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शनि जयंती इस बार 22 मई यानी की कल मनाई जाएगी। वही शनि जयंती का दिन शनिदेव को प्रसन्न करने का होता हैं इस बार शनि जयंती विशेष योग में आ रही हैं शनिदेव बहुत ही धीमी चाल चलने वाला ग्रह माना जाता हैं वही 30 वर्षों के बाद शनि स्वयं की राशि में गोचर हुए हैं फिर इसके बाद 11 मई को अपनी ही राशि में वक्री हुए हैं शनि के वक्री होने पर इस बार शनि जयंती मनाई जा रही हैं शनि के वक्री होने के कारण जिन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या चल रही हैं तो उनके ऊपर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता हैं शनि जयंती के अवसर पर शनि के महामंत्रों के जाप करने से राशियों पर चल रहा बुरा असर भी कम हो सकता हैं तो आज हम आपको शनि जयंती से जुड़ी जानकारी प्रदान करने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं।

आपको बता दें कि शनि की साढ़ेसाती धनु, मकर और कुंभ राशि पर हैं वही शनि की ढैय्या मिथुन और तुला राशि पर हैं। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए और साढ़ेसाती वह ढैय्या को कम करने के लिए शनि का पौराणिक मंत्र का जाप करना अच्छा माना जाता हैं। ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।यहां पढ़ें शनि देव का वैदिक मंत्र—
ऊँ शन्नोदेवीर- भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः।

यहां पढ़ें तांत्रिक शनि मंत्र—
ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।

करें शनि बीज मंत्र का जाप—
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।

जानिए शनि का सामान्य मंत्र—
ॐ शं शनैश्चराय नमः।

शनि गायत्री मंत्र का जाप—
ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्

आपको बता दें कि शनिदोष से छुटकारा पाने के लिए आप इन महाउपायों को अपना सकते हैं जैसे हनुमान जी की उपासना करें। इससे शनिदोष कम हो जाता हैं गरीबों को दान दें। शनिवार के दिन शनि देव को सरसों का तेल चढ़ाएं। उड़द दान का दान करना अच्छा होगा। इस दिन गरीबों को भोजन कराएं। पीपल के पेड़ के नीचे तेल का एक दीपक जलाएं। काले कुत्ते को घी की रोटी खिलाएं।

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