बेन येदेर की बदैलत 60 साल बाद चैम्पियंस लीग क्वार्टर फाइनल में सेविला

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बेन येदेर की ओर से किए गए दो गोल के दम पर सेविला फुटबाल क्लब ने 60 साल बाद चैम्पियंस लीग के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर फुटबाल के इतिहास में एक नया पन्ना दर्ज कर लिया है। सेविला ने इसके साथ ही अपने क्लब अध्यक्ष जोस कास्त्रो की उम्मीद को भी पूरा कर दिया। सेविला ने इसके तहत युनाइटेड से 2-1 से जीत हासिल कर चैम्पियंस लीग क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली है।

सेविला ने मंगलवार रात को खेले गए चैम्पियंस लीग अंतिम-16 दौर के दूसरे चरण के मैच में मैनचेस्टर युनाइटेड को 2-1 से मात दी। इससे पहले, दोनों टीमों के बीच प्री-क्वार्टर फाइनल के पहले चरण का मैच गोलरहित रहा था। ओल्ड ट्रेफोर्ड में मंगलवार रात खेले गए मैच का पहला हाफ दोनों टीमों के बीच गोल रहित रहा।

इसके बाद, दूसरे हाफ में 74वें मिनट में येदेर ने गोल कर सेविला का खाता खोला। इसके चार मिनट बाद येदेर ने एक गोल कर स्कोर 2-0 कर दिया। रोमेलु लुकाकु ने 84वें मिनट में युनाइटेड के लिए गोल कर स्कोर 1-2 किया, लेकिन यह जीत के लिए पर्याप्त नहीं था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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