नजरंदाज करने पर गंभीर हो जाता है सोरियाटिक आर्थराइटिस (विश्व आर्थराइटिस दिवस 12 अक्टूबर पर विशेष)

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आर्थराइटिस एक ऐसी बीमारी बन गई है, जिससे हमारा देश लगातार जूझ रहा है। हालांकि, चिकित्सा क्षेत्र में उन्नति से इस समस्या से ग्रसित लोगों को लाभ मिला है। लेकिन आर्थराइटिस के विभिन्न रूपों के बारे में जानना बेहद जरूरी है। नोएडा स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन रूमेटोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. बिमलेश धर पांडेय का कहना है, “पिछले कई सालों में सोरियाटिक आर्थराइटिस के मामलों में वृद्धि पाई गई है। सोरायसिस से पीड़ित मरीजों को इससे जुड़ी परेशानी की जानकारी नहीं होती और समय के साथ सोरियाटिक आर्थराइटिस हो जाता है।”

एक शोध में यह बात सामने आई है कि एक-चौथाई सोरायसिस मरीज सोरियाटिक आर्थराइटिस से पीड़ित पाए जाते हैं।

पांडे के अनुसार, सोरायटिक आर्थराइटिस का कोई स्थाई इलाज नहीं है और समय के साथ इसमें होने वाला परिवर्तन अलग-अलग मरीजों में अलग नजर आता है। समय पर जांच और इलाज के विकल्पों द्वारा इसके लक्षणों को प्रभावी रूप से संभाला जा सकता है।

मुंबई के गोरेगांव स्थित क्वेस्ट क्लीनिक में इंटरनल मेडिसिन रूमेटोलॉजी के फिजीशियन डॉ. सुशांत शिंदे ने कहा, “सोरियाटिक आर्थराइटिस कई सारे जोड़ों को प्रभावित कर सकता है, जैसे उंगलियों, कलाइयों, टखनों के जोड़ों और यह जोड़ों में सूजन, दर्द और अकड़न छोड़ जाता है। सोरायसिस मरीजों के लिए इसके लक्षणों पर नजर रखना जरूरी है। इस बीमारी की देखभाल के लिए मरीजों को जीवनशैली में बदलाव की सलाह दी जाती है। इन प्रमुख बदलावों में संतुलित आहार लेना और धूम्रपान छोड़ना शामिल है।”

लेकिन, भारत में पाया जाने वाला सबसे आम आर्थराइटिस ऑस्टियो आर्थराइटिस है। देशभर में 22 से 39 प्रतिशत लोग इससे पीड़ित हैं। इसके कारण जोड़ों के लिए कुशन का काम करने वाले कार्टिलेज घिस जाते हैं। इसकी वजह से जोड़ों में सूजन और दर्द हो जाता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस उम्र बढ़ने, मोटापा, हॉर्मोन्स के अनियंत्रित हो जाने और बैठे रहने वाली जीवनशैली के परिणामस्वरूप होता है। आमतौर पर घुटने, कूल्हे, पैर और रीढ़ इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।

रूमेटॉयड आर्थराइटिस (आरए), आर्थराइटिस का एक अन्य प्रकार है। आरए एक ऑटोइम्यून डिसीज है, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर पर, खासतौर से जोड़ों पर हमला करना शुरू कर देती है। नजरंदाज करने पर जोड़ों में सूजन और गंभीर क्षति हो सकती है। आरए के मरीजों की त्वचा पर गांठें बन जाती हैं जिन्हें रूमेटॉयड नॉड्यूल्स कहते हैं। यह अक्सर जोड़ों जैसे पोरों, कुहनी या ऐड़ी में होता है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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