Ashwin Sanghi की पुस्तक ‘कीपर्स ऑफ द कालचक्र’ पर बनेगी सीरीज

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भारतीय लेखक अश्विन सांघी की किताब ‘कीपर्स ऑफ द कालचक्र’ पर एक सीरीज बनाई जा रही है। यह बेस्टसेलर किताब पौराणिक-विज्ञान पर आधारित है जो उन पुरुषों की कहानी बताती है जो ‘कालचक्र’ की रक्षा करते हैं। सांघी ने कहा, “यह किताब एक अत्याधुनिक थ्रिलर है, जो क्वांटम सिद्धांत और आध्यात्मिकता के बीच की उन चीजों की खोज करती है, जो उन दोनों में कॉमन हैं। मैं बहुत उत्साहित हूं कि यह किताब लाखों स्क्रीन पर जीवंत होगी।”

विक्रम मल्होत्रा की अबुदंतिया एंटरटेनमेंट ने इस पुस्तक के अधिकार खरीद लिए हैं और इस पर मल्टी-सीजन सीरीज बनाने की योजना है। किताब को सीरीज के रूप में लाने के लिए लेखक सांघी स्क्रीनराइटर्स की टीम के साथ काम करेंगे।

अबुंदतिया इंटरटेनमेंट के फाउंडर और सीईओ विक्रम मल्होत्रा ने कहा है, “हम लगातार कई विचारोत्तेजक कहानियां और कहानीकारों को देख रहे हैं और अश्विन के साथ इस शानदार कंटेंट के लिए हमारे सहयोग से बेहतर उदाहरण नहीं हो सकता है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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