share market : सेंसेक्स 1100 अंकों से ज्यादा लुढ़का, 3 फीसदी टूटा निफ्टी

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खराब वैश्विक संकेतों और डेरीवेटिव सीरीज के अनुबंधों की समाप्ति के चलते गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में कोहराम का आलम रहा। सेंसेक्स 1,115 अंक लुढ़कर 36,554 पर ठहरा जबकि निफ्टी 326 अंक टूटकर कर 10,806 पर बंद हुआ। दोनों प्रमुख सूचकांकों में करीब तीन फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

सेंसेक्स पिछले सत्र से 1,114.82 अंकों यानी 2.96 फीसदी की गिरावट के साथ 36,553.60 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी बीते सत्र से 326.30 अंकों यानी 2.93 फीसदी की गिरावट के साथ 10,805.55 पर बंद हुआ।

निराशाजनक वैश्विक संकेतों से घरेलू शेयर बाजार में आरंभिक कारोबार के दौरान बिकवाली का भारी दबाव बना हुआ था।

बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के 30 शेयरों पर आधारित प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स पिछले सत्र से 386.24 अंकों की गिरावट के साथ 37,282.18 पर खुला और 36,495.98 तक लुढ़का जबकि दिनभर के कारोबार के दौरान सेंसेक्स का ऊपरी स्तर 37,304.26 रहा।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के 50 शेयरों पर आधारित प्रमुख संवेदी सूचकांक निफ्टी बीते सत्र से 120.85 अंकों की गिरावट के साथ 11,011 पर खुला और दिनभर के कारोबार के दौरान 10,790.20 तक लुढ़का जबकि कारोबार के दौरान निफ्टी का ऊपरी स्तर 11,015.30 रहा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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