कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Ahmed Patel का निधन

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल का बुधवार तड़के 3.30 बजे गुरुग्राम के अस्पताल में निधन हो गया। वह 71 साल के थे और एक महीने पहले कोरोनावायरस से संक्रमित हुए थे। उनके बेटे फैसल पटेल ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। पटेल ने ट्वीट में लिखा, “गहरे दुख के साथ मैं अपने पिता के असामयिक निधन की घोषणा कर रहा हूं। उनका निधन 25/11 को तड़के 3.30 बजे हुआ।”

एक महीने पहले कोविड -19 का परीक्षण पॉजिटिव आने के बाद से वे गुरुग्राम स्थित एक अस्पताल में इलाज करा रहे थे। डॉक्टरों की एक टीम उनकी निगरानी कर रही थी।

पटेल के निधन पर पूर्व वित्त मंत्री पी.चिदंबरम ने ट्वीट किया, “गहरे सदमे में हूं। यह जानकर बहुत दुख हुआ कि मेरे प्रिय मित्र अहमद पटेल का आज सुबह निधन हो गया .. दो दशकों से वह कांग्रेस पार्टी के मजबूत स्तंभों और भरोसेमंद काउंसलर में से एक थे। उन्हें बहुत याद किया जाएगा। मैं उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और शोक संतप्त परिवार के सदस्यों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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