Senior citizens को लगता है, आर्थिक मुद्दे देश के लिए प्रमुख चिंता

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देश के अधिकांश वरिष्ठ नागरिकों का मानना है कि अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति उन सबसे बड़े मुद्दों में शामिल है, जिनका भारत को तुरंत समाधान करने की जरूरत है। मैक्स समूह इकाई अंतरा द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक, दूसरी शीर्ष चिंता बेरोजगारी है।

इसके अलावा, कोरोनावायरस संक्रमण और सामाजिक अलगाव का डर लॉकडाउन के दौरान वरिष्ठ नागरिकों के लिए दो बड़ी चिंताएं थीं।

सर्वे में आधे से ज्यादा बुजुर्गो ने कहा कि भारत ने कोविड-19 महामारी को संभालने की पूरी कोशिश की है।

दुनिया भर में एक स्थापित और स्वीकार्य उद्योग होने के बावजूद, वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल सेवाएं अभी भी भारत में एक प्रारंभिक चरण में हैं।

अंतरा के एमडी और सीईओ रजित मेहता ने कहा, उनकी (वरिष्ठ भारतीयों) की जरूरतें और आकांक्षाएं काफी आगे आ गई हैं। वे अब अर्थव्यवस्था में सक्रिय योगदानकर्ता बनना चाहते हैं, गरिमा के साथ जीवन व्यतीत करना चाहते हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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