एक्जिट पोल के बाद कांग्रेस कार्यालय में सन्नाटा

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लोकसभा चुनाव के लिए आए एक्जिट पोल में भाजपा नेतृत्व वाले राजग को भारी जीत का अनुमान जाहिर किए जाने के एक दिन बाद राष्ट्रीय राजधानी में कांग्रेस के कार्यालय में सोमवार को सन्नाटा पसरा रहा।

पार्टी कार्यालय में कई वरिष्ठ नेता मीडिया से बातचीत के लिए नदारत थे। पूरे दिन एक भी संवाददाता सम्मेलन नहीं हुआ।

पूरे दिन अधिकांश मीडियाकर्मी एक्जिट पोल पर टिप्पणी के लिए वरिष्ठ पार्टी नेताओं का इंतजार करते रहे।

कांग्रेस के एक नेता ने नाम न जाहिर करने के अनुरोध पर आईएएनएस से कहा, “एक्जिट पोल के परिणाम सही नहीं हैं। वे अतीत की तरह किसी भी दिशा में जा सकते हैं।”

यह पूछे जाने पर कि वे मतगणना के दिन के लिए क्या तैयारी कर रहे हैं? नेता ने कहा, “23 मई को मतगणना के दिन बाइट्स और बहस के लिए मीडिया कक्ष तैयार किए जा रहे हैं।”

हालांकि पार्टी पूर्व प्रधानामंत्री दिवंगत राजीव गांधी की मंगलवार को जयंती मनाने की तैयारी कर रही है।

अधिकांश एक्जिट पोल में भाजपा नेतृत्व वाले राजग की लोकसभा चुनाव में भारी जीत दिखाई गई है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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