पति के इस कदम को देख पुलिस भी रह गई हैरान, घटना झकझोर देने वाली

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दोस्तों, किस इंसान को दिमाग अपना संतुलन खो दे इसके बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है । आज हम आपको एक ऐसे ही मामले के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में जानकर आप तो क्या इंसानियत भी शर्म से पानी पानी हो जाएगी । तो चलिए जानते हैं इसके बारे में । ऐसा ही कुछ देखने को मिला पश्चिमी महाराष्ट्र के कोल्हापुर में जहां एक व्यक्ति ने अपनी ही पत्नी की हत्या इसलिए कर दी क्योंकि उसे लगा कि वह उसकी मां की मौत से खुश है । जी हां, पति को इतना गुस्सा आया कि उसने अपनी पत्नी को दूसरी मंजिल से नीचे फेक दिया ।

पुलिस ने गत बुधवार को इस मामले के बारे में मीडिया को बताया है कि, ऐसा माना जा रहा है कि आरोपी संदीप लोखंडे की पत्नी शुभांगी लोखंडे ने सास मालती लोखंडे की मौत के गम में जान दे दी । एक अधिकारी ने बताया कि शुभांगी की मौत की जांच करने पर पता चला कि उसके पति ने उसकी हत्या की क्योंकि वह उसकी मां के गुजरने पर खुशी मना रही थी । इसी बात से नाराज होकर उस महिला के पति ने उसे दूसरी मंजिल से धक्का दे दिया और उस महिला की मौके पर ही मौत हो गई । इसके आगे पुलिस ने बताया कि, अपराधी ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है ।

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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