वैज्ञानिकों ने लैब में खोजा जीवन का नया रूप

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जयपुर। वैज्ञानिक कई तरह के प्रयोग लैब में करते रहते हैं इसे उनको कई तरह की जानकारी मिलती है।  फिर इनको वो बाहर अमल में लाते है। इसी तरह से हार्वर्ड मेडिकल स्कूल, बोस्टन के शोधकर्ताओं ने एक शोध में नई सफलता हासिल की है। इन वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि इन्होंने लैब में जीवन का एक नया रूप विकसित कर लिया है ये बहुत ही चौंका देने वाला शोध है लेकिन शोध के लिए दार्शनिकों ने इसकी कड़ी निंदा की है इनके हिसाब से विज्ञान को अपने दायरे में रहते हुये काम नहीं कर रहा है। इनका कहना था है कि प्रकृति के कार्य को चुनौती देना कई प्रकार की समस्याओं को जन्म दे सकता हैं।

इस तरह के शोध वास्तव में ईश्वरीय शक्ति को चुनौती देता है जो कि मानवीय अस्तित्व को संकट में डाल सकता है। कई सालों से शोधकर्ता निरंतर ई कॉली जीवाणु के जीन में 62,000 परिवर्तन करने की कोशिश कर रहे थे और अब वैज्ञानिकों ने यह सफलता हासिल कर ली है। शोधकर्ताओं ने इसके बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह जीवन की नई परिकल्पना है, इसे सुपरमाइक्रोबी कहा गया है। वैसे तो आम जीवित वस्तु से काफी अलग है क्योंकि यह पृथ्वी पर मौजूद सभी तरह के ज्ञात विषाणुओं से लड़ने में सक्षम है इससे पहले कोई जीव ऐसा नहीं था

जो इन सबसे लड़ने में सक्षम हो। इसकी खास बात तो ये है कि यह अज्ञात वाइरसों के हमले से बचने के लिये यह स्वतः ही प्रतिरोधक प्रोटीन निर्मित करने में सक्षम होगा। सुपरमाइक्रोबी असल में वैज्ञानिक इसमें आनुवांशिक परिवर्तन करके सुपरमानव का निर्माण करना चाहते हैं। प्रोटीन संश्लेषण की प्रक्रिया सभी अंगों में संपन्न होती रहती है और ई कॉली सुपरमाइक्रोबी में चार प्रकार के अतिरिक्त कृत्रिम अमीनो अम्ल प्रयुक्त किये जाते है जो कि रोग प्रतिरोधक क्षमता का अद्वितीय विस्तार करते हैं, .यही कारण है कि ये सुपरमाइक्रोबी और भी शक्तिशाली बन जाते हैं।

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