Gujarat में स्कूलों का खुलना टला, अहमदाबाद में रात का कर्फ्यू

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गुजरात सरकार ने राज्य में कोरोना के मामले बढ़ते देख स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों को फिर से खोलने के निर्णय पर यू-टर्न ले लिया है। साथ ही सरकार ने राज्य की वित्तीय राजधानी अहमदाबाद में रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक रात का कर्फ्यू लगाने का भी फैसला किया है। राज्य सरकार ने गुरुवार की रात को कहा कि स्कूल और कॉलेजों को फिर से खोलने के फैसले को ‘स्थगित’ कर दिया गया है।

बता दें कि दिवाली के त्योहार के बाद विशेषकर अहमदाबाद में कोरोनावायरस मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी है। लिहाजा सरकार ने 11 नवंबर को विचार-विमर्श करके 23 नवंबर से स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को फिर से खोलने का फैसला करते हुए इस संबंध में निर्देश भी दे दिए थे।

शिक्षा मंत्री भूपेन्द्र सिंह चूडास्मा ने पहले चरणबद्ध तरीके से शिक्षा संस्थानों को खोलने की बात कही थी। साथ ही ऑनलाइन ऐजुकेशन जारी रखने के भी निर्देश दिए थे। हालांकि प्राथमिक स्कूलों को फिर से खोलने पर कोई निर्णय नहीं हुआ था। सरकार ने कहा था कि वह 11 नवंबर के फैसले के कार्यान्वयन पर प्रतिक्रिया का विश्लेषण करने के बाद आगे निर्णय करेगी।

सरकार के इस कदम की जनता ने खासी आलोचना हुई थी और अब सरकार को अपना फैसला रद्द करना पड़ा है।

श्रयूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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