एसबीआई के वित्तीय नतीजे दूसरी तिमाही में आकर्षक रहने की संभावना

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भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के वित्तीय नतीजे चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में बेहतर रहने की उम्मीद जताई जा रही है। एक ब्रोकिंग कंपनी की माने तो अनिश्चितता के माहौल में एसबीआई की आय में प्री-प्रॉविजनिंग ऑपरेटिंग लेवल में स्थिर संचालन प्रदर्शन, राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण समाधानों से रिकवरी और कर्ज लागत सामान्य होने से सुधार हो सकता है।

एसबीआई को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 2,312 करोड़ रुपये का लाभ हुआ था क्योंकि प्रॉविजनिंग में सालाना स्तर पर 11 फीसदी की कमी आई थी।

मोतीलाल ओसवाल के अनुसार, एसेट क्वालिटी मर्जर और प्रतिकूल दर के माहौल के कारण विगत कुछ वर्षो के दौरान एसबीआई की आय में कमी आने के बाद अब रिस्क-रिवार्ड अनुकूल हो गया है।

मोतीलाल ओसवाल ने कहा, “सिस्टम में उच्च रेटिंग घटने के कारण संकटग्रस्त समूह में नए नाम जुड़ गए हैं लेकिन एसबीआई के आकार को देखते हुए नए संकट का प्रबंधन किया जा सकता है जोकि कुल ऋण का दो फीसदी है।”

मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि कॉरपोरेट टैक्स की दर 30 फीसदी से घटकर 22 फीसदी होने से भी आय बढ़नी चाहिए।

न्यजू स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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