एसबीआई लागत घटाने, श्रमशक्ति की कुशलता बढ़ाने पर ध्यान देगा

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भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन रजनीश कुमार ने मंगलवार को कहा कि बैंक लागत घटाने, युक्तिकरण, और अपनी श्रमशक्ति की कुशलता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगा। बैंक की 65वीं वार्षिक आम सभा की बैठक(एजीएम) में कुमार ने कहा, “लागत घटाने, युक्तिकरण, और श्रमशक्ति की कुशलता बढ़ाने, स्टाफ की उत्पादकता बढ़ाने, और प्रशासनिक कार्यालयों से श्रमशक्ति को सेल्स की भूमिका में तैनाती पर ध्यान दिया जाएगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि बैंक उभरते संकट पर लगातार नजर रखेगा और अपने उपभोक्ताओं की मदद के लिए तथा संपत्ति गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आगे बढ़कर कदम उठाएगा।

कुमार ने शेयरधारकों से कहा कि साथ ही बैंक किसी भी स्थान से काम करने के लिए ‘वर्क फ्रॉम एनीवेयर’ (डब्ल्यूएफए) अवसंरचना भी स्थापित करेगा, और कामकाजी जीवन के संतुलन के सामाजिक पक्षों का ख्याल रखा जाएगा। इस कदम से लागत घटाकर 1,000 करोड़ रुपये बचाए जा सकते हैं और कोविड-19 संकट के दौरान यह बैंक कारोबार की निरंतरजा के लिए एक प्रमुख उपकरण होगा।

चेयरमैन ने एमएसएमई सेगमेंट पर बैंक के जोर को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत पैकेज द्वारा एमएसएमई के लिए पैदा किए गए अवसरों की तर्ज पर बैंक ने माइक्रो मार्केट में मूल्य डालने के लिए एक ‘फायनेंशियल इनक्लूसन एंड माइक्रो मार्केट’ स्थापित किया है, जिसका बिजनेस मॉडल लागत प्रभावी है। बैंक में एसएमई रीवैंप पहले से प्रक्रिया में है।

न्यजू स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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