भगवान शिव की शिवलिंग स्वरुप में क्यों होती हैं पूजा, जानिए रहस्य

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शिव का पवित्र महीना 6 जुलाई से शुरू हो चुका हैं वही श्रावण मास में या फिर अन्य दिनों में आपने मंदिरों में शिवलिंग की पूजा करते हुए शिव भक्तों को देखा होगा। आपने कभी किसी और देवता की लिंग रूप में पूजा होते हुए नहीं देखा होगा। शिवलिंग की पूजा और उसके रहस्य के बारे में शिव पुराण में विस्तार से बताया गया हैं तो आज हम आपको शिवलिंग की पूजा, उसके महत्व और रहस्य के बारे में बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं।

शिव पुराण के मुताबिक जो मनुष्य श्रवण, कीर्तन और मनन इन तीनों साधनों के अनुष्ठान में समर्थ न हो, वह भगवान शिव के लिंग और मूर्ति की स्थापना करके नित्य उसकी पूजा करें। तो संसार सागर से पार हो सकता हैं। शिवलिंग की पूजा करने को लेकर शिवपुराण में जो वर्णन हैं वह इस प्रकार हैं भगवान शिव ही ब्रह्मरूप होने के कारण निकल यानी निराकार कहे गए हैं रुपवान होने के कारण उनको सकल भी कहा जाता हैं इसलिए वे सकल और निकल हैं शिव के निराकर होने के कारण ही उनकी पूजा का आधारभूत लिंग भी निराकार ही प्राप्त हुआ हैं। ​अर्थात शिवलिंग शिव के निराकार स्वरुप का प्रतीक हैं। इस तरह शिव के सकल या साकार होने के कारण उनकी पूजा का आधारभूत विग्रह साकार प्राप्त होता हैं अर्था शिव का साकार विग्रह उनके साकार स्वरूप का प्रतीक होता हैं। सकल और अकल रूप होने से ही वे ब्रह्म शब्द से कहे जाने वाले परमात्मा हैं यही वजह है कि सब लोग लिंग और मूर्ति दोनों में ही सदा भगवान शिव की पूजा करते हैं शिव से भिन्न जो अन्य देवता है वे ब्रह्म नहीं हैं इस कारण से उनके निराकार लिंग उपलब्ध नहीं होते हैं।

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