शनि प्रदोष पर ​विशेष संयोग, आज इन उपायों से मिलेंगी साढ़े साती और ढैय्या से राहत

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श्रावण मास के अधिष्ठाता भगवान शिव है जो कि शनिदेव के गुरु माने जाते हैं सभी नौ ग्रहों और समय को नियंत्रित करने के कारण उनको महाकाल कहा जाता हैं शनि की कुदृष्टि और पीड़ा से केवल शिव या उनके अंशावतार हनुमान जी ही बचा सकते हैं इसलिए सावन में शनिदेव की पूजा करने से न केवल शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती हैं बल्कि सालभर शनिदेव की पूजा की विशेष आवश्यकता नहीं होती हैं इस बार सावन का आखिरी शनिवार को प्रदोष का भी शुभ संयोग बन रहा हैं जो कि बहुत ही फलदायी हैं इस बार सावन का आखिरी शनिवार 1 अगस्त यानी की आज पड़ा हैं। तो आज हम आपको शनि प्रदोष व्रत से जुड़ी कुछ उपाय बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं।

अगर जातक की कुंडली में शनि के कारण संतान बाधा आ रही हैं तो शनि प्रदोष को पूजा करना विशेष माना जाता हैं संतान पक्ष से सुख नहीं मिल रहा हैं तो भी शनि पूजा से लाभ प्राप्त होता हैं वही अगर कुछ विशेष उपाय किए जाएं तो शनि से संबंधित सभी दोष सावन के इस शनिवार को समाप्त हो सकते हैं। शनि की मारक दशा चल रही हैं तो शिव और शनि की संयुक्त पूजा करने से चमत्कारिक लाभ प्राप्त होगा। सावन के शनिवार के दिन शनिदेव के निमित्त किया गया दान कभी निष्फल नहीं होता हैं। वही शाम के समय पीपल के वृक्ष में जल डालें शिव मंदिर में एक घी का दीपक जरूर जलाएं। इसके बाद शनि के वैदिक मंत्र का कम से कम तीन बार जाप जरूर करें। वैदिक मंत्र होगा। “ॐ शं शनैश्चराय नमः” आज के दिन काली वस्तुओं का किसी गरीब या जरूरतमंद लोगों को दान करना अच्छा होता हैं।

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