होटल लीला-ब्रुकफील्ड के सौदे को एसएटी का नया झटका

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होटल लीला बुक्रफील्ड को बेचने का सौदा एक बार फिर अटक गया है। इस बार प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (एसएटी) से इस सौदे को झटका लगा है, जिसने होटल लीला वेंचर लिमिटेड को उसकी संपत्ति ब्रूकफील्ड एसेट मैनेजमेंट इंक को बेचने के संबंध में शेयरधारकों की मंजूरी वाले पोस्टल बैलट रिजॉल्यूशन के परिणाम की घोषणा करने व उस पर कार्रवाई करने के विरुद्ध निर्देश दिया है। इससे पहले आईटीसी ने इस संबंध में बाजार विनियामक के आदेश के खिलाफ न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया और कहा कि संबंधित पक्ष के हस्तांतरण के कारण बिक्री की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

 

होटल लीला ने 13 अगस्त को अपने शेयरधारकों को नया पोस्टल बैलट नोटिस जारी किया था और उसने इसके परिणाम की घोषणा 18 सितंबर को करने की योजना बनाई थी।

 

आईटीसी का तर्क है कि पोस्टल बैलेट रिजॉल्यूशन पर 3,950 करोड़ रुपये के सौदे को मंजूरी देने के सिलसिले में कंपनी में 26 फीसदी स्वामित्व वाली जेएम फाइनेंशियल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड एक संबंधित पक्ष हस्तांतरण है। एसएटी ने शुक्रवार को आईटीसी, सेबी और होटल लीला की दलीलें सुनीं।

 

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

 

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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