स्वच्छता अभियान : दिल्ली के सभी लेटर बाक्सों की हुई रंगाई

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स्वच्छ भारत अभियान के तहत राजधानी के सभी डाकघरों में विशेषकर 16 से 30 नवम्बर तक दिल्ली परिमंडल ने स्वच्छता पखवाड़ा मनाया। इस पखवाड़े में दिल्ली परिमंडल के सभी डाक संभागों, डाकघरों, मेल कार्यालयों ने हिस्सा लिया है। इस अभियान के तहत दिल्ली के 400 लेटर बाक्सों की रंगाई की गई। अभियान के समापन पर शुक्रवार को मुख्य पोस्टमास्टर जनरल आईन्द्री अनुराग ने बताया, “अभियान के तहत हमने लगभग 400 लेटर बाक्सों की रंगाई की जिससे दिल्ली के सभी लेटर बाक्स नए हो गए हैं। इसके अलावा सभी डाकघरों और मेल कार्यालयों, पी.एंड टी कालोनियों की सफाई की गई और पौधारोपण किया गया।”

आईन्द्री अनुराग ने बताया कि स्वच्छता अभियान को विशेष बनाते हुए डाक घर ने सौकड़ों स्कूलों में इस विषय पर निबंध लेखन का भी आयोजन किया।

उन्होंने कहा, “इस पखवाड़े के दौरान हमारे पोस्टमैन ने स्वच्छता दूत का कार्य किया और स्वच्छता के बारे में अपने वितरण क्षेत्र में लोगों को जागरूक किया। इसके साथ ही उन्होंने लोगों को प्लास्टिक बैग प्रयोग में न लाने की भी सलाह दी।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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