सैफ कप : मालदीव को हराकर सेमीफाइनल में पहुंचा भारत

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भारतीय पुरुष फुटबाल टीम ने यहां सैफ कप के अपने दूसरे मैच में मालदीव को 2-0 से हराकर टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। बंगबंधु स्टेडियम में रविवार को खेले गए ग्रुप-बी के इस मैच में भारतीय टीम के लिए निखिल पुजारी और मनवीर सिंह ने गोल किए।

मौजूदा चैम्पियन भारत ने मैच की शुरुआत से ही दमदार प्रदर्शन किया और विपक्षी टीम के डिफेंस पर दबाव बनाया।

लगातर आक्रमण का फल भारत को 36वें मिनट में मिला और पुजारी ने कलात्मक खेल दिखाते हुए अपनी टीम को बढ़त दिला दी।

इसके बाद, भारतीय खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने गेंद पर अधिक समय तक नियंत्रण रखते हुए विपक्षी टीम को आक्रमण का मौका नहीं दिया।

मैच के 44वें मिनट में मालदीव के खिलाड़ी ने बॉक्स के पास गलती की और मनवीर ने मौके को भुनाते हुए भारत की बढ़त को दोगुना कर दिया।

दूसरे हाफ में भी भारत का दबदबा देखने को मिला, लेकिन कोई भी टीम गोल करने में कामयाब नहीं हो पाई। सेमीफाइनल में भारत का मुकाबला बुधवार को पाकिस्तान से होगा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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