क्या एशिया की तीसरी सबसे कमजोर करेंसी बन गया रुपया, जानिए क्या रही वजह

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भारत में आर्थिक सुस्ती और बढ़ती महंगाई हर किसी पर भारी पड़ रही है। टेलीकॉम सेक्टर से लेकर ऑटो कारोबार मंदी की मार झेल रहा है। देश की आर्थिक विकास दर का भारत की मुद्रा रुपए पर  नकारात्मक असर पड़ा है। पिछले 1 साल में रुपया डॉलर के मुकाबले टूट गया है और एशिया की तीसरी सबसे कमजोर करेंसी के रूप में साबित हुआ है। ब्लूबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2019 से लेकर अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले 2 प्रतिशत तक गिर गया है।

रूपये में गिरावट कोई पहली बार नहीं हैं। इससे पहले वर्ष 2019 में भी रुपए में कमजोरी देखी गई थी। पिछले 10 में से 8 साल डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट दर्ज की जा रही है। साल 2018 में रुपए में गिरावट दर्ज की गई थी। 1 साल में 8 प्रतिशत तक रुपया कमजोर हो चुका है। हालांकि, बांग्लादेश की करेंसी टका ने पिछले एक साल के दौरान भारतीय मुद्रा रुपए से अच्छा प्रदर्शन किया है। बांग्लादेश की करेंसी टका 1 वर्ष के अंदर 1.50 प्रतिशत तक टूट गई है। भारत की मुद्रा रुपया 2 फीसदी तक गिर गया। इस प्रकार टका रुपए के मुकाबले 50 प्वाइंट बेस्ट प्रदर्शन किया है।

अर्थव्यवस्था के मामले में भी बांग्लादेश भारत को कड़ी चुनौती दे रहा है। डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया सबसे अधिक 9.5 प्रतिशत तक लुढ़का है। दक्षिणी कोरिया की करेंसी 4.8 प्रतिशत तक गिर गई। रुपए में 2 फीसदी की गिरावट को लेकर भारत के आर्थिक विश्लेषक अपने-अपने तर्क देने में लगे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ में उम्मीद से ज्यादा गिरावट आना रुपए में कमजोरी का कारण है।

 

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