डॉलर के मुकाबले रूपया मजबूत

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घरेलू शेयर बाजार में लौटी तेजी और वैश्विक बाजार में आई रिकवरी से शुक्रवार को देसी करेंसी रुपए में डॉलर के मुकाबले मजबूती आई। रूपया बीते सत्र के 18 पैसे की बढ़त बनाते हुए 75.39 रुपए प्रति डॉलर पर खुला जबकि बीते सत्र में देसी करेंसी 11 पैसे की कमजोरी के साथ 75.57 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसीडेंट (करेंसी व एनर्जी रिसर्च) अनुज गुप्ता ने कहा कि वैश्विक बाजार में आई रिकवरी और घरेलू शेयर बाजार में तेजी के रूख से देसी करेंसी को मजबूती मिली है।

उधर, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत का सूचक डॉलर इंडेक्स की चाल नरम पड़ गई है। डॉलर इंडेक्स में 27 मई के बाद लगातार गिरावट जारी है। डॉलर इंडेक्स को 99.36 तक उछला था जिसके बाद लुढ़क कर 96.63 पर आ गया है।

डॉलर इंडेक्स यूरो, स्विस फ्रैंक, जापान की मुद्रा येन, कनेडियन डॉलर, ब्रिटिश पाउंड और स्वीडिश क्रोना के मुकाबले डॉलर की ताकत का सूचक है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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