रुपया अपनी सही कीमत के करीब : विशेषज्ञ

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रुपया अपनी सही कीमत के करीब पहुंच रहा है और अब इसके आगे गिरने की ज्यादा संभावना नहीं है। हालांकि यह नीतिगत हस्तक्षेप का सही वक्त है, ताकि नकारात्मक भावनाओं को रोका जा सके। विशेषज्ञों ने शनिवार को यह बात कही। यस बैंक की समूह अध्यक्ष और मुख्य अर्थशास्त्री सुभदा राव ने कहा, “उचित मूल्य संगणना के मुताबिक, रुपया वर्तमान में अपनी सही कीमत के करीब पहुंच रहा है। यहां से आगे गिरने की संभावना कम है।”

रुपया शुक्रवार को 34 पैसे के सुधार के साथ 71.85 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इसके पिछले दिन रुपया ग्रीनबैक पर 72.19 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था। उन्होंने हालांकि कहा कि नीतिगत हस्तक्षेप की जरूरत है, ताकि ‘नकारात्मक भावनाओं’ को रोका जा सके।’

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के भारत, नेपाल, भूटान के वरिष्ठ रेसिडेंट प्रतिनिधि एंडरेस डब्ल्यू बूअर ने कहा कि आकलन के मुताबिक, “रुपये की विनिमय दर इसकी वास्तविक क्षमता के समकक्ष ही है।”

बैंक द्वारा किए गए अध्ययन का हवाला देते हुए राव ने कहा कि रियल इफेक्टिव एक्सचेंज दर (आरईईआर) के आधार पर भारतीय रुपये का मूल्य वास्तविक स्तर पर ही है, जहां इसे होना चाहिए था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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