राज्यसभा में हंगामा, कार्यवाही 2 बजे तक स्थगित, जानिए इसके बारे में !

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संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा), अन्नाद्रमुक (एआईडीएमके) और कुछ अन्य विपक्षी पार्टियों के विभिन्न मुद्दों पर जोरदार विरोध व हंगामे की वजह से बुधवार को सदन की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

जैसे ही शून्य काल शुरू हुआ तेदेपा और अन्नाद्रमुक के सदस्य सभापति के आसन के पास पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे।

सभापति एम. वेंकैया नायडू ने उत्तेजित सदस्यों से सदन की कार्यवाही चलने देने का आग्रह किया, ेलेकिन वे हंगामा करते रहे।

नायडू ने कहा, “यह कोई तरीका नहीं है। अपनी सीटों पर वापस जाएं।” लेकिन विरोध कर रहे सांसदों पर उनके आग्रह का कोई असर नहीं हुआ। नायडू ने इसके बाद सदन की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

इससे पहले, जब राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो सदन के सदस्यों ने जाने-माने वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग्स और पूर्व सदस्य वी.पी.एम स्वामी के निधन पर शोक प्रकट किया।

सदन में उन जवानों को भी श्रद्धांजलि दी गई, जो मंगलवार को छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले में शहीद हो गए। साथ ही तमिलनाडु में रविवार को जंगल में लगी आग में मारे गए ट्रैकर्स को भी श्रद्धांजलि दी गई।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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