Roshan Lal Sethi Memorial Tournament : देव का शतक, भाटी देवी अकैडमी जीता

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दिल्ली अंडर-19 खिलाड़ी देव लाकड़ा के शानदार 146 रनों की शतकीय पारी के दम पर माता भाटी देवी अकैडमी ने गुरुवार को पहले रोशन लाल सेठी मेमोरियल प्राइज मनी अंडर-19 क्रिकेट टूर्नामेंट में ज्ञांती क्रिकेट अकैडमी को 65 रन से हरा दिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी भाटी देवी अकैडमी की ओर से देव लाकड़ा ने अपनी शतकीय पारी में 11 छक्के और 11 चौके जमाए। उनके अलावा ऋतिक शर्मा के 55 रन की बदौलत टीम ने 35 ओवर में 10 विकेट पर 261 रन का स्कोर बनाया।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी ज्ञांती अकैडमी 30 ओवर में 196 रन बनाकर ऑल आउट हो गई। टीम के लिए यशवर्धन ओबराय ने 83 रन बनाए। अभिषेक कुमार ने 48 रन देकर चार विकेट लिए।

भाटी देवी अकैडमी की ओर से ऋतिक और देव ने बल्लेबाजी में जलवा दिखाने के बाद गेंदबाजी में भी अपना दबदबा बनाते हुए क्रमश: 2 और 1 विकेट लिया।

रोशन लाल सेठी हिंदी खेल पत्रकारिता जगत में पितामह का दर्जा रखते थे। बीते साल उनका देहांत हुआ थाष

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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