रालोद ने कहा, भाजपा की नीतियों से देश को खतरा

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राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) का कहना है कि भाजपा की नीतियां विभाजनकारी है, जिससे देश को खतरा उत्पन्न हो गया है। पार्टी का कहना है कि अब जनता भी भाजपा का खेल समझने लगी है और इस लिए अब भाजपा की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। रालोद (मध्य उप्र) के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भाजपा के लोग जिस तरह प्रदेश व देश की जनता को गुमराह कर सत्ता का सुख भोग रहे हैं, उसका जवाब देने के लिए प्रदेश की जनता तैयार बैठी है।

उन्होंने कहा कि यूपी में कानून व्यवस्था कैसे सही रह सकती है, जब कानून के रखवाले पुलिस ही भाजपा, बजरंग दल, रामसेना का शिकार हो रही है। योगी सरकार में चोरी डकैती, हत्या, लूट, दुष्कर्म जैसे अपराधों का ग्राफ बढ़ा है, दलित व मुस्लिम डरा हुआ है।

उन्होंने कहा कि भाजपा की विभाजनकारी नीतियों से देश को खतरा उत्पन्न हो गया है। यह गंभीर चिंता की बात है। अपना स्वार्थ साधने के लिए भाजपा किसी भी स्तर तक गिर जाती है। भाजपा का खेल जनता को समझ में आ गया है और उसकी उल्टी गिनती शुरू हो गई है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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