डाउन सिंड्रोन्म से पीड़ित बच्चों में पाया जा रहा है अर्थराइटिस का खतरा

डाउन सिंड्रोम यह एक तरह की बीमारी होती  है जिसमे बच्चा मानसिक रूप से पूरी तरह विकास नहीं कर पाता है । डाउन सिंड्रोम एक ऐसा डिसऑर्डर है जो बच्चे को किसी भी उम्र में अपनी गिरफ्त में ले सकता है।

0

 

जयपुर । डाउन सिंड्रोम यह एक तरह की बीमारी होती  है जिसमे बच्चा मानसिक रूप से पूरी तरह विकास नहीं कर पाता है । डाउन सिंड्रोम एक ऐसा डिसऑर्डर है जो बच्चे को किसी भी उम्र में अपनी गिरफ्त में ले सकता है। यहां तक कि 6 महीने से अधिक उम्र के बच्चे को भी। इस डिसऑर्डर के कारण बच्चे में क्रोमोजोम्स की संख्या बढ़ जाती है, जो बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करती है।

डाउन सिंड्रोम बच्चों में जन्मजात होने वाली गंभीर बीमारियों में से एक है। पीड़ित बच्चों का शारीरिक, मानसिक विकास सामान्य बच्चों की तरह नहीं होता। ऐसे में बच्चे को उत्साहित करेंगे तो उनका सिंड्रोम काबू में रहेगा। यह बीमारी भ्रूण में क्रोमोजोम की मात्रा अधिक होने से होता है। बच्चों का विकास शारीरिक विकृतियों से होता है।

डाउन सिंड्रोम पीड़ित बच्चों में लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं। ऐसे बच्चों की मांसपेशियां कम ताकतवर होती हैं। हालांकि उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों की ताकत बढ़ती रहती है, लेकिन सामान्य बच्चों की तुलना में बैठना, चलना या उठना सीखने में ज्यादा समय लेते हैं। बौद्धिक, मानसिक व शारीरिक विकास धीमा होता है।

हाल ही हुई एक नई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि कई तरह के वैक्सीन्स और मेडिसिन्स के बावजूद जुवेनाइल इडियोपैथिक अर्थराइटिस (JIA) के कई तरह के केस सामने आ रहे हैं और इनका मुकाबला करने के लिए हमें जल्द से जल्द नए और कारगर तरीकों की जरूरत है। खास बात यह है कि जिन बच्चों में डाउन सिंड्रोम के लक्षण देखे जाते हैं, उनके इस बीमारी की चपेट में आने के आसार कई गुना बढ़ जाते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here