आरआईआईएल का मुनाफा 29 फीसदी गिरा

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चालू वित्त वर्ष की 31 दिसंबर 2018 की तीसरी तिमाही में रिलायंस इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रकचर लि. (आरआईआईएल) ने मुनाफे में 28.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की है। कंपनी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। कंपनी के मुताबिक, समीक्षाधीन अवधि में उसका मुनाफा 1.90 करोड़ रुपये रहा, जोकि वित्त वर्ष 2017-18 की समान तिमाही में 2.67 करोड़ रुपये था।

कंपनी ने एक बयान में कहा, “31 दिसंबर 2018 को खत्म हुई तिमाही में आरआईआईएल ने कुल 2,501 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 2,571 लाख रुपये थी।”

आरआईआईएल रिलायंस इंडस्ट्रीज समूह को पाइपलाइनों के माध्यम से पेट्रोलियम उत्पादों और पानी की ढुलाई, किराए पर निर्माण मशीनरी, और अन्य सहायक सेवाएं प्रदान करती है, साथ ही रिलायंस इंडस्ट्रीज लि. को भी ये सेवाएं देती हैं।

बयान में कहा गया है, “वर्तमान में आरआईआईएल के पास एन्विल के विस्तार की कोई योजना नहीं है। (एन्विल लोहे या स्टील के एक भारी ब्लॉक को कहते हैं, जिस पर गर्म धातुओं को हथौड़े या भारी मशीनों से आकार दिया जाता है।)”

न्यूज स्.ोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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