दिल्ली डायनामोज से जुड़े रेने मिहेलिक

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इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) क्लब दिल्ली डायनामोज ने स्लोवेनिया के मिडफील्डर रेने मिहेलिक के साथ एक साल का करार किया है। रेने ने पिछले सीजन चेन्नईयन एफसी की खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाई थी और क्लब के लिए 14 मैचों में दो गोल दागे और चार असिस्ट किए।

दिल्ली डायनामोज के मुख्य कोच जोसेफ गोम्बाऊ ने कहा, “हम शुरुआत से ही मिहेलिक पर नजर बनाए हुए थे क्योंकि वह डेड बाल और ओपन प्ले की स्थिति में विपक्षी टीम के लिए बहुत खतरनाक साबित होते हैं। अटैक करते समय उनकी कलात्मकता हमारे लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। वह एक प्रेरित खिलाड़ी हैं जो अपनी पिछली सफलताओं को दोहराना चाहता है।”

एनके मारिबर क्लब से स्नातक मिहेलिक 19 वर्ष की उम्र में स्लोवेनिया के लिए अंतर्राष्ट्रीय फुटबाल खेलने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने।

उन्होंने कहा, “मुझ पर भरोसा करने और यह बेहतरीन मौका देने के लिए मैं डायनामोज और कोच गोम्बाऊ को धन्यवाद देता हूं। मैं इस टीम के खिलाफ पहले खेल चुका हूं, यह टीम कठोर है इसलिए मैं इसके खिलाड़ियों एवं स्टाफ से जुड़कर खुश हूं।” मिहेलिक 2010 में मारिबर से अलग हुए और पुर्तगाल के शीर्ष क्लब नेसिओनल के लिए भी खेले।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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