शरीर से बच्चेदानी को निकलवाने से, महिलाओं में बढ़ता भूलने की बीमारी का खतरा

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जयपुर।गलत खानपान और बदली लाइफस्टाइल के कारण महिलाओं में पुरूषों की तुलना में कई बीमारियों का खतरा अधिक रहता है।शरीर में बढ़ती समस्या के कारण कई महिलाएं अपनी बच्चेदानी को निकलवाने का फैसला लेती है, लेकिन शरीर से बच्चेदानी को निकलवाने का असर महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए घातक होता है।इससे महिलाओं के दिमाग पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है और साथ ही बच्चेदानी को निकलवाने से डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी का खतरा कई गुणा बढ़ जाता है।

कई शोध में इस बात को बताया गया है कि महिलाएं के द्वारा बच्चेदानी को हटाने की सर्जरी करवाने से उनमें जल्दी ही मेनोपॉज की समस्या भी हो सकती है।जिसका असर दिमाग पर पड़ता है और ऐसे में महिलाओं में धीरे-धीरे चीजों को भूलने की बीमारी होने लगती है, जिसे ब्रेन फॉग की बीमारी कहा जाता है।

यह समस्या बच्चेदानी को निकलने से शरीर में होने वाले हॉर्मोन्स की वजह से होता है।हालांकि फिर भी इस बात को नजरअंदाज करते हुए कई महिलाएं यूट्रस सर्जरी करवा रही है, जिससे उनके शरीर में कई घातक बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।

बच्चेदानी को निकलवाने के लिए की जाने वाली सर्जरी में लैप्रोस्कोपी हिस्टेजरेक्टोमी में पॉवर मोसेलेटर्स के द्वारा बच्चेदानी के टिश्यूपज को अलग किया जाता है,जिससे कि लैप्रोस्कोपिक चीरे से बच्चेदानी को बाहर निकाला जा सके।

इस सर्जरी के दौरान महिलाओं के शरीर में कैंसर जनित टिश्यूचज के पूरे शरीर में फैलने की संभावना रहती है।जिससे महिलाओं के शरीर में कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।ऐसे में अपनी बच्चेदानी की सर्जरी करवाने से पहले डॉक्टर से एक बार सलाह अवश्य करें।

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